(BRICS): ब्रिक्स से अमेरिका क्यों परेशान है?

ब्रिक्स दुनिया का सबसे मजबूत संगठन है इसकी स्थापना 2009 में हुई थी शुरुआत में इसमें ब्राजील रूस भारत चीन जुड़े हुए थे इन चारों का नाम मिलकर के ब्रिक नाम पड़ा लेकिन आपको बता दे की 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल हो जाने से ब्रिक्स नाम पड़ गया बता दें कि ब्रिक्स किसी खास मकसद के लिए बनाया गया था सबसे पहले है आपसी सहयोग के लिए और वैश्विक मंच पर अपनी आवाज उठाने के लिए आर्थिक विकास के लिए और अमेरिका के डॉलर के निर्भरता को कम करने के लिए यह ब्रिक्स की स्थापना की गई 

ब्रिक्स से अमेरिका क्यों परेशान है

ब्रिक्स (BRICS) शब्द कैसे बना ?

ब्रिक्स शब्द का नाम इन सभी सदस्य देशों के शुरुआती अक्षर के नाम पर पड़ा है जो कुछ इस प्रकार है

B – (Brazil) R – (Russia) I – (India) C – (China) S – (South Africa) B,R,I,C,S इन शब्दों को मिला दिया जाए तो इसका नाम ब्रिक्स (BRICS) पड़ता है जब ब्रिक्स की स्थापना हुई थी तब इसमें सिर्फ पांच ही सदस्य देश थे देखते ही देखते इसमें काफी देश जुड़ गए और अपना दाखिला लिया चलिए आपको इन देशों के नाम बताते हैं इसमें ईरान, इजिप्ट ,इथोपिया, संयुक्त अरब अमीरात, शामिल है

ट्रंप को क्यों सता रहा डर ?

चलिए आपको बताते हैं कि अमेरिका को ब्रिक्स से क्या तकलीफ है

कमजोर पड़ जाएगा डॉलर 

ब्रिक्स का बढ़ता वर्चस्व 

अमेरिका ने अपने पैर पर मारी खुद कुल्हाड़ी 

नोबेल पुरस्कार का क्रेडिट नहीं मिला 

मोदी शी जिनपिंग और पुतिन आपस में बात करते हुए 

1.कमजोर पड़ जाएगा डॉलर 

दोस्तों आप लोगों को बता दे कि दुनिया में जो भी व्यापार होता है पर डॉलर में ही होता है इसलिए अमेरिका हर किसी देश को अपने डॉलर द्वारा कंट्रोल करता है इसमें कोई संदेह की बात नहीं है की BRICS की स्थापना डॉलर की क्षमता को कम करने के लिए की गई है और रूस ने सुझाव दिया था कि अगर डॉलर को खत्म करना है तो हमें अपने देश की करेंसी (जैसे रुपये, युआन, या रूबल) में ही व्यापार बढ़ाने पर जोर देना होगा ताकि डॉलर की निर्भरता को हम कम कर सकें

इसलिए अमेरिका को यह डर सता रहा है कि अगर BRICS देश अपनी योजना में सफल हुए तो डॉलर की मांग कम हो जाएगी जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लग सकता है और अमेरिका वैश्विक बाजारों पर अपना कंट्रोल भी खो सकता है इसलिए डोनाल्ड ट्रंप ने साफ-साफ कहा है कि अगर ब्रिक्स देश डॉलर को हटाने की जबरदस्ती कोशिश करेंगे तो मैं BRICS देशों पर 100% टैरिफ लगा दूंगा और यह बात डोनाल्ड ट्रंप को बार-बार सता रही है और डरा रही है

2. BRICS का बढ़ता वर्चस्व 

दोस्तों दुनिया में ब्रिक्स का दबदबा बढ़ने लगा है और काफी सारे देश BRICS से आकर्षित हो रहे हैं और सम्मिलित होने के लिए आग्रह कर रहे हैं और BRICS की लगातार ताकत बढ़ रही है और इसे पूरी दुनिया देख रही है और वही BRICS अमेरिका के दबदबे को भी कम कर रहा है आपको बता दे कि रूस और चीन जैसे देश अमेरिका के साथ पहले से ही रिश्ते खराब है और अगर भारत इसमें और मजबूती से जुड़ता है

तो जाहिर है कि ट्रंप के मुश्किलें बढ़ने वाली है और आपको बता दे कि BRICS देश भी अमेरिका की धमकी से नहीं डर रहे हैं और उल्टा BRICS के देश अमेरिका को चुनौती दे रहे हैं इससे यह साफ दिखता है कि BRICS देश अब अमेरिका की बात नहीं मानेंगे

3.अमेरिका ने अपने पैर पर मारी खुद कुल्हाड़ी

अमेरिका ने भारत के ऊपर ही टैरिफ नहीं लगाया है बल्कि सभी देशों पर भारी भरकम टैक्स लगाया है भारत के बराबर ही ब्राजील के ऊपर टैरिफ लगाया है जिससे ब्राजील का बयान सामने आया है और ब्राजील ने कहा है कि टैरिफ के मामले में चीन और भारत से ही बात होगी ट्रंप से कोई बात नहीं होगी | और सभी देशों ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह टेक्स अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के नियमों के खिलाफ है और इस अमेरिका को जल्द से जल्द वापस लेना चाहिए और अमेरिका जबरदस्ती टैरिफ ठोकने का काम कर रहा है जो सरासर गलत है

ट्रंप को डर लग रहा है कि अगर भारत और चीन एक साथ हो गए तो वह टैरिफ का जवाब जरूर देंगे और यह अमेरिका के लिए एक बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है आपको बता दें कि भारत और चीन अमेरिका से सबसे ज्यादा व्यापार करते हैं अगर यह देश जवाबी टैरिफ लगाएंगे तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था खतरे में आ सकती है

रूस चीन और भारत की ताकत

दोस्तों अगर रूस चीन और भारत अगर यह देश एक साथ आते हैं तो यह अमेरिका को पानी पिलाने का दम रखते हैं चलिए मैं आपको बताता हूं कि इस तिकड़ी में कितनी ताकत है 

रूस चीन और भारत की ताकत

परमाणु बम की ताकत ?

दोस्तों अमेरिका एक परमाणु संपन्न देश है और अमेरिका के पास लगभग 5225 परमाणु बम है जो दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु बम अमेरिका के पास है अगर वही ब्रिक्स के देश रूस चीन और भारत एक साथ आ जाएं तो अमेरिका से ज्यादा परमाणु बम हो जाएंगे आपको बता दें कि रूस के पास 5580 परमाणु बम है

जो दुनिया में पहले स्थान पर है परमाणु बम के मामले में और वहीं चीन के पास 600 परमाणु बम है और भारत के पास 172 परमाणु बम है अगर इन तीन देशों के परमाणु बम को जोड़ दिया जाए तो यह टोटल 6352 परमाणु बम हो जाते हैं जो अमेरिका से ज्यादा है और सीधे-सीधे अमेरिका को मात दे सकते हैं 

सैन्य ताकत ?

अमेरिका के पास सैनिकों की संख्या 14 लाख है और वहीं रूस के पास 13 लाख से ज्यादा सैनिक है और चीन के पास 20 लाख और भारत के पास 14 लाख सैनिक है इन टोटल देशो के पास सेना मिलाकर 47 लाख है जो अमेरिका से काफी ज्यादा है और अमेरिका को धूल चटाई जा सकती है  

कारोबार की ताकत ?

कारोबार के मामले में आपको बता दे की अमेरिका 29 ट्रिलियन डॉलर का कारोबार करता है और वहीं चीन 38 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार करता है रूस 7 ट्रिलियन डॉलर का और भारत 16 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार करता है  इन तीनों देशों के व्यापार को मिला दिया जाए तो यह टोटल 61 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार होगा जो अमेरिका से काफी ज्यादा है  

जनसंख्या ?

आबादी के लिहाज से आपको बता दे की अमेरिका की जनसंख्या 34 करोड़ है और चीन की जनसंख्या 142 करोड़ भारत की जनसंख्या 146 करोड़ और रूस की जनसंख्या 14 करोड़ है इन तीन देशों की टोटल जनसंख्या मिला दे तो 302 करोड़ होगी जो अमेरिका से काफी ज्यादा है 

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