प्रयागराज के मेले में में करीब एक-दो दिन से विवाद चल रहा है और यह विवाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी के द्वारा हो रहा है आपको बता दे की उत्तर प्रदेश के अफसर द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेज दिया। और अफसर ने स्वामी जी से पूछा है कि आप कैसे बन गए शंकराचार्य 24 घंटे के भीतर दे जवाब? शंकराचार्य के बारे में अधिक जानने के लिए, कृपया आगे पढ़ें।
शंकराचार्य क्यों फंस गए ?
शंकराचार्य पर विवाद हाल के दिनों में बढ़ गया है और लोगों में इसकी चर्चा जोरों पर है।
आपको बता दे कि सुप्रीम कोर्ट में यह मामला विचारधीन है कि असली शंकराचार्य कौन है उसी को उत्तर प्रदेश की पुलिस ने आधार बनाकर शंकराचार्य जी से पूछा कि आपको शंकराचार्य नाम कहां से मिला ?
मामला क्या है ?
आपको सारा मामला बता दे की मौनी अमावस्या वाले दिन शंकराचार्य अपने शिष्यों और अपने साथियों के साथ माघ मेले में प्रस्थान करते हैं तो पुलिस वालों ने शंकराचार्य को पालकी सहित रोक दिया आपको बता दे कि शंकराचार्य जी जिस पालकी पर बैठते हैं वो एक तरह का शंकराचार्य जी का बैठने का स्थान होता है पुलिस ने स्वामी जी से कहा कि आप अपनी पालकी से उतर कर के 100 मीटर की दूरी पर चलकर के स्नान कर सकते हैं।
अन्यथा आप पालकी के साथ अंदर नहीं जा सकते हैं पुलिस वालों का कहना है कि माघ मेले में भीड़ के चलते स्वामी जी को पालकी सहित अंदर नहीं जाने दिया जैसे ही पुलिस ने स्वामी जी समेत शिष्य और उनके साथियों को रोका तो धक्का मुक्के दोनों तरफ से हुई और स्वामी जी ने आरोप लगाया कि पुलिस वाले हमें स्नान नहीं करने दे रहे हैं
पुलिस क्या कह रही है ?
इस पूरे मामले में पुलिस का कहना है कि हमने ना ही स्वामी शंकराचार्य जी को स्नान करने से रोका है और ना ही हमने उनके साथ धक्का मुक्की नहीं की है यह सब आरोप गलत है और यह सब हमने उनकी भलाई के लिए किया है और माघ मेले में भगदड़ ना हो इसलिए हमने आपकी पालकी को रोका है
और पुलिस वालों ने आगे कहा कि शासन प्रशासन के द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार हम कार्य कर रहे हैं ऐसा कोई भी कार्य नहीं कर रहे हैं जिससे कि आपको ठेस पहुंचे
शंकराचार्य जी का बयान ?
शंकराचार्य जी का बयान सामने आया है और उन्होंने कहा है कि माघ मेले से शासन प्रशासन द्वारा हमें फुटपाथ पर लाकर छोड़ दिया और हम फुटपाथ पर ही रहेंगे जब तक शासन प्रशासन हमसे माफी नहीं मांग लेता और मैं गंगा स्नान भी नहीं करूंगा जब तक प्रशासन द्वारा मुझसे माफी नहीं मांग ली जाती आपको बता दे की शंकराचार्य जी द्वारा सोमवार के दिन भोजन नहीं किया गया है